ना पैसा, ना ही कोई कोच ट्रेनर फिर भी 15 साल की उम्र में रचा दिया इतिहास बिहार की रहने वाली लड़की (बेटी) ने अपने मेहनत के दम पर अकेले खड़े होकर इतिहास लिख दिया। हम बात कर रहे हैं। अक्षरा गुप्ता जी के बारे में इन्होंने 15 साल की उम्र में ही टीम इंडिया में जगह बना लिया। और वूमेन (women’s) टीम इंडिया की कप्तान बन चुकी है। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा कामयाबी हासिल करना किसी फरिश्ते का साथ देने जैसा है।
अक्षरा गुप्ता शुरुआती जीवन/परिचय

अक्षरा गुप्ता बिहार के पूर्व जिले के छोटे से गांव सीमावर्ती शहर रक्सौल की रहने वाली है। अक्षरा का जन्म एक बेहद सिंपल एवं साधारण परिवार मैं हुआ था।
उनके पिता जो राज किशोर शाह रक्सौल में ही एक छोटा सा चिकन शॉप का दुकान है।उनके पूरे परिवार का गुजारा इसी छोटे से दुकान से गुजारा होता। उनकी माता रीना देवी जो घर की हाउसवाइफ है। वही अपने पूरे परिवार को संभालती है। हम एक ऐसे समाज से आते हैं।
जहां पर लड़कियों को आज भी घर की चार दीवारों रखने का प्रयास करते है। एक सीमित में रहकर पढ़ाई लिखाई करवाते हैं। फिर उनकी शादी कर दी जाती है। लेकिन अक्षरा के माता-पिता ने अपनी प्यारी सी लाडली बेटी पर भरोसा जताया और अक्षरा के सपनों को कभी कम नहीं होने दिया। ऐसेेेे महान माता-पिता इस दुनिया में बहुत कम ही देखने को मिलते है।
अक्षरा गुप्ता की पूरी जानकारी
- पुरा नाम – अक्षरा गुप्ता ( Akshara Gupta)
- जन्म स्थान – रक्सौल, (बिहार)
- उम्र – लगभग 15 साल
- पिता का नाम – राज किशोर शाह
- माता का नाम – रीना देवी
- कोच ट्रेनर – चाचा और बड़ा भाई
- पेशा – दाएं हाथ की विस्फोटक ओपनर बल्लेबाज (कप्तान टीम इंडिया की)
- घरेलू टीम – बिहार महिला अंडर-19 क्रिकेट टीम
- हाई स्कोर – वनडे मैच में 126 गेंद पर 306 रनों की ताबड़तोड़ पारी
गली क्रिकेट से लेकर स्टेडियम तक का सफर
अक्षरा गुप्ता क्रिकेटर बनने बनने की कहानी कुछ ऐसी है। कि फिल्मी दुनिया से कुछ कम नहीं है। जब यह छोटी सी थी तब से ही यह क्रिकेट खेलना और देखना बहुत पसंद करती थी। जब भी टीवी पर क्रिकेट आता तो यह अपने सारे काम काज छोड़कर बस टीवी के सामने बैठ जाती क्रिकेट मैच देखने।
लेकिन यह क्रिकेट खेल नहीं पाती थी। सिर्फ देखती थी क्योंकि कोई क्रिकेट एकेडमी या पेशेवर कोचिंग की सुविधा नही थी। तो अक्षरा अपने भाई और मोहल्ले के लड़कों के साथ मिलकर गली-क्रिकेट खेला करती थी। जब वह बल्लेबाजी करती तो तब सिर्फ चौके छक्के ही मारती और वहीं से उनकी नई पहचान बन चुकी थी।
जब उनके पापा को पता चला कि उनकी बेटी लड़कों के साथ खेल रही है। और यह सिर्फ चौके, छक्के ही लगाती है। अपना पूरा ध्यान सिर्फ क्रिकेट खेलने में लगती है। तब उन्होंने गरीबों के तंगहाली के बावजूद भी अपनी बेटी का साथ देने का फैसला किया।
भले ही हमारे पास इतने पैसे नहीं है कि अक्षरा को किसी बड़े शहर की महंगी क्रिकेट अकादमी में भेज सकें। तो उन्होंने अपने ही घर बाहर बगीचे में नेट लगवा दिया। तब उनके चाचा और भाई मिलकर उसे दिन-रात गेंदबाजी करते थे। अक्षरा भी कई घंटों तक बैटिंग की प्रैक्टिस करती रहती थी।
अक्षरा ने अपनी दिमाग और ताकत को इतना मजबूत कर लिया। कि जब वह पहली बार जिला स्तर पर मैच खेलने गई, तब कुछ लोगों ने मजाक उड़ाया और बोला कि यह अभी बच्ची है। जब ओर बड़ी हो जाएगी तब लाना खेलने के लिए। अक्षरा ने बात को इग्नोर किया। और बैटिंग करने गई, वहा पर इन्होंने खड़े होकर इतनेेेेेेे चौके छक्के मारे की सिलेक्ट भी देख कर हैरान हो गए। तुरंत ही अक्षरा को सिलेक्ट कर लिया।
बिहार में आया तूफान 126 गेंदों में 306 रनों का वर्ल्ड रिकॉर्ड
जून 2026 में बिहार के क्रिकेट असोसिएशन (BCA) द्वारा भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड मैदान पर महिला अंदर-19 वनडे ट्रॉफी का मैच शुरू किया गया था। इस टूर्नामेंट के एक मुकाबले में अक्षरा गुप्ता ने वह कर दिखाया, जो कि इतिहास में नहीं हुआ था।
इस मैच में ओपनिंग करने आई। अक्षरा गुप्ता ने सामने वाली टीम के गेंदबाज की धज्जियां उड़ा दिया। उसने चारों तरफ सिर्फ चौके छक्के की बरसात कर दिया। अक्षरा ने सिर्फ 126 गेंद खेलकर 306 रन बना कर नवाद रही। 55 चौके और 8 छक्के मारे, यह 300 रनों का आंकड़ा पार करने वाली भारतीय क्रिकेटर खिलाड़ी बन गई।
तब इनका नाम बिहार की लेडी सहवाग का नाम दे दिया गया। क्योंकि यह उसी प्रकार की बैटिंग करी जिस प्रकार पूर्व क्रिकेटर के दिग्गज वीरेंद्र सहवाग से काफी मिलती जुलती है।
15 साल की उम्र में कप्तानी और बीसीसीआई (BCCI)के बड़े रिकॉर्ड
अक्षरा गुप्ता सिर्फ एक बेहतरीन बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि उनके अंदर गजब की कल भी है। उनकी इस खूबी को देखकर बिहार के क्रिकेट एसोसिएशन ने बहुत कम उम्र में ही बिहार अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी शॉप दी।
उनके अलावा अक्षरा गुप्ता का बड़ा नाम और अनोखा रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज कर लिया है। वह एक ही सीजन में बीसीसीआई (BCCI) के सभी चारों अलग-अलग फॉर्मेट और कम आयु में बिहार की पहली महिला खिलाड़ी बनी है।
- अंडर – 15 (U-15)
- अंडर-19 T20 (U- 19 T20)
- अंडर-19 वनडे (U- 19 One Day)
- अंडर- 23 वनडे (U- 23 One Day
अक्षरा की फिटनेस और उनकी धमाकेदार पारियों को देखकर सीनियर लोगों ने उन्हें अंडर- 23 में खेलने का मौका दे दिया। वह अक्षरा की बैटिंग को देखा तो आपने आप को रोक नहीं पाए।
भारतीय खिलाड़ी अक्षरा गुप्ता का बड़ा भविष्य
बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले वैभव सूर्यवंशी ने जिस प्रकार क्रिकेट में सभी का ध्यान अपनी और खींचा था। ठीक उसी प्रकार बिहार की बेटी उभरती हुई सभी के सामने आ रही है। जैसे वैभव सूर्यवंशी 13 से 14 साल की उम्र में नंबर वन क्रिकेटर बने इस प्रकार अक्षरा गुप्ता 15 साल की उम्र में धमाकेदार पारियां खेलकर वैभव को टक्कर दे दिया।
अगर यह इसी प्रकार क्रिकेट में में अच्छा प्रदर्शन करती रही तो बहुत ही जल्द हमें वह महिला आईपीएल ( womens premier league) और उसके बाद इंडिया टीम की नीली जर्सी पहनकर खेलते हुए नज़र आएंगी।
निष्कर्ष
अक्षरा गुप्ता की कहानी से हमें यह सिख मिलती है। कि भले ही उनके पास अच्छी सुविधा नहीं थी। खेलने की लेकिन इनके पापा घर के बगीचे में ही नेट लगाया। अपनी बुद्धि और कड़ी मेहनत के दम पर इन्होंने इतिहास रच दिया।
रक्सौल की इस ‘ शेरनी ‘ ने बिहार का नाम पूरे इंडिया में रोशन कर दिया। हम यही उम्मीद करते है कि यह और भी आगे जाए। बहुत जल्द ये इंटरनेशनल में डेब्यू कर सके।
FAQs
अक्षरा गुप्ता कौन है?
अक्षरा गुप्ता भारत की उभरती हुई महिला क्रिकेटर है। जो घरेलू बिहार की अंदर-19 महिला टीम की कप्तान है।
अक्षरा गुप्ता कहा कि रहने वाली है?
पूर्वी चंपारण जिले के एक छोटे गांव रक्सौल की रहने वाली है।
अक्षरा गुप्ता की एज?
लगभग 15 साल